जानवरों पर क्रूरता की कहानी – Animal Cruelty Facts Hindi

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Animal Cruelty Facts Hindi – आज सुबह मैंने देखा कि जानवर भी इंसानों की तरह बर्ताव करना लगे हैं। किसी वैज्ञानिक ने सभी जानवरों पर प्रयोग कर उसे हमारी तरह बना दिया है। अब जानवर पहले की तरह नहीं रह गए, वे भी हमारी तरह बोलने, लिखने, समझने लग गए हैं। वह बिल्कुल हमारी तरह प्यार करते, हंसते, खाते, घर में रहते और गुस्सा करते हैं।

जो उनसे अच्छी बात करता उससे अच्छी बात करते और जो खराब बात करता उससे झगड़ने लग जाते। अब जानवर पिंजरे में नहीं आजादी से रहने लग गए हैं। वह भी अपने हक की बात करने लग गए हैं। धीरे-धीरे जानवरों ने अपनी शक्ति इतनी बड़ा ली कि वह सारी पृथ्वी पर राज करने लग गए हैं।

उनकी तादाद ज्यादा होने की वजह से बेचारे इंसान उसे डरने लग गए हैं। अब जानवरों में इंसानो को गुलाम बना दिया। गाय रोज इंसानों को बांधकर मशीन से उनका दूध निकालने लगी, क्योंकि फैट ज्यादा ना हो जाए इसलिए उसने दूध देना बंद कर दिया। वह इंसानों का दूध निकाल कर अपने बच्चों को पिलाने लगी। बकरा इंसानों को काटकर खाने लगा और खुशियां मनाने लगा।

मुर्गे इंसानों के नवजात बच्चों को जन्म से पहले ही निकाल कर खाने लग गए। कुत्ते इंसानों के साथ खेलने लग गए हैं और अपना दिल बहलाने लग गए हैं। शेर, हिरन, भालू  सभी इंसानो को दौड़ा दौड़ा कर पीठ रहे हैं। कई दूसरे जानवर तो इंसानों का शिकार भी करना लग गए हैं। यह इतना भयानक था कि मैं नींद में ही रो पड़ा और मेरी आंखें खुल गई। मेरी सांस में सांस जब मुझे पता चला की यह सब एक सपना है।

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दोस्तो क्या आपको भी यह सपना अच्छा लगा, नहीं। हम ऐसे जिंदगी नहीं जी सकते जिसमे इतनी क्रुरता और भयानता हो। तो जरा सोचो यह बेसहारा जानवर ऐसी जिंदगी कैसे सहन करते होंगे। इस सपने को उल्टा करके सोचो, हम यही तो करते हैं इन बिचारे जानवरों के साथ। जिसको देखा उसका शोषण कर दिया, जो काम का नहीं हो उसे मार दिया।

जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था तब सभी जीव एक समान थे, और सभी पृथ्वी पर समान हक रखते थे। हमारी पृथ्वी हरी-भरी और खुशहांल लगती थी। इसके विकास में सभी जानवरों का बराबर योगदान था क्योंकि सभी जानवर एक दूसरे को खाकर इकोसिस्टम को बनाते थे।


फिर आया बंदर की नस्ल का इंसान, चुकी बंदर नक़ल करने में माहिर था  इसलिए उन्होंने हर जानवर की नकल की। शेर को मांस खाते देखा तो मांस खाने लग गया और हिरन को घास खाते देखा तो फूल पत्ती खाने लगा। वैसे तो बंदर शाकाहारी होते हैं पर नकल करने की आदत की  वजह से वह मांसाहारी भी बन गए।

धीरे धीरे बन्दर के दिमाग का विकास होता गया और दिमाग ज्यादा होने के वजह से वह दूसरे जानवरों पर राज करने लगा। और बस्तियों में रहने लगा। धीरे-धीरे बस्तियां कबीले, रियासत, शहर और देश में बदल गई। आज हमारी जनसँख्या इतनी है कि हमें इंसान के अलावा कोई जानवर नहीं दिखता।

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दोस्तों यह मत भूलो कि आज आप जहां पर बैठकर यह पोस्ट पढ़ रहे हैं वहां पर भी कभी जंगल थे और उस पर dinosaur प्रजाति का राज था।  उन्होंने भी इंसानों की तरह पृथ्वी पर आतंक फैला दिया था। इनकी भी जनसंख्या इतनी बढ़ गई थी कि यह सभी जानवरों को मारने लगे। प्रकृति ने उन्हें भी खत्म कर दिया। इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले पर वह प्रकृति के आगे जीत नहीं सकता। अगर आज आप पृथ्वी को नुकसान पहुंचाओगे तो एक ना एक दिन उसका परिणाम आपको भी डायनासोर की तरह भुगतना होगा।

इंसान को जब से समझ आई है वह तब से पृथ्वी का दोहन कर रहा है इसे दूसरी भाषा में कहां जाय तो पृथ्वी को चूस रहा है। जैसे जानवरों को मारना, खाना, शिकार करना, पहाड़ों को खोदकर सोना, हीरे, चांदी निकालना। जमीन को खोदकर पानी, तेल, मिट्टी निकालना। जंगल  काटना, समुंद्र के अंदर तेल निकालना, परमाणु और हाइड्रोजन बम का इस्तेमाल करना।

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जरा सोचो इंसानों, पृथ्वी पर आप ही स्पेशल नहीं हो, दूसरे जानवर भी यहाँ  पर रहने का पूरा हक रखते हैं। आपको उन्हें नुकसान पहुचाने का  और बंधक बनाने का कोई अधिकार नहीं है। यह धरती सभी जीव की है जिसने यहाँ जन्म लिया है। इसलिए दोस्तों जो लोग ऐसा करते हैं उनसे मैं निवेदन करूंगा कि वह पृथ्वी के संसाधनों को बर्बाद ना करें और औरों को भी जागरुक करें, नहीं तो एक दिन ऐसा आएगा जब हमे भी  डायनासोर की तरह पृथ्वी से मिटा दिया जाएगा।

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