स्मार्टफोन और इन्टरनेट आपको बीमार न कर दे ?


Social media addiction – अगर आप अपने स्मार्टफोन को बिस्तर के बगल में रखकर सोते है, नींद खुलने के बाद जागते ही अपने ईमेल, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम चेक करते है। बहुत देर तक लैपटॉप या किसी स्क्रीन न दिखे तो आप तनावग्रस्त , निराश तथा बेचैन होने लगते है। फोन से दूर हटने ही बैचेनी कि शिकायत है तो आपको नोमोफोबिया नामक रोग हो चूका है।

social media addiction

पहले इंटरनेट एडिस्शन डिसऑडर के तोर पर एक असामान्य व्यवहार समझा जाता था। अब यह एक बीमारी कि शक्ल ले चूका है। इससे खासतोर पर युवा वर्ग चपेट में है। इस पर नियंत्रण नही किया गया तो यह एक महामारी का रूप ले सकता है। यह आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर सकती है। डिजिटल दुनिया को लेकर सचेत रहने के ये कुछ टिप्स जो आपको अमल में लाने चाहिए।

ईमेल देखने का समय तय करे –

ब्रिटेन में हुए एक शोध के मुताबित ईमेल के ज्यादा इस्तेमाल से तनाव, उच्च रक्तचाप, थायरोइड और दिल के दौरे जैसी समस्याओ के बीच सीधा संबंध होता है। बेवजह के ईमेल कम करे और बार-बार ईमेल चेक करने कि आदत को बदले। दिन का एक निशिचत समय ईमेल देखने के लिए तय कर ले। आजकल स्मार्टफोन ने लोगो  को 24 घंटे ईमेल से जुड़े रहने कि सुविधा दे दी है और यह तनाव को बढ़ाने का कारण बन रहा है। अगर लोग लगातार अपने ईमेल से चिपके न रहे तो वह ज्यादा शांत रह सकते है और उनकी प्रजनन शमता ज्यादा बेहतर हो सकती है।

व्हाटसएप का करे संयमित तरह इस्तेमाल –

आज कल के युवा शारीरिक गतिविधियों को छोड़ इन मल्टीमीडिया फोन से ही अपने दिन की शुरुआत करते है। और रात भर जाग कर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। आज का सोशल मीडिया सोशल को नुकसान पंहुचा रहा है। आज अगर दो व्यक्ति पास में बैठे है फिर भी वह एक दुसरे से बात करने के बजाय मोबाइल में ही रहते है। यही हकीक़त है।  हर चीज़ की अति ख़राब होती है। सोशल मिडिया भले ही आज के समय कि जरूरत है यह लगातार व्यस्तता और बीमारियाँ पैदा कर रहा है। शोध में पाया गया कि हद से ज्यादा व्हाटसएप का इस्तेमाल करने वाले लोगो का स्ट्रेस लेवल बढ़ रहा है। और इसी तरह व्हाटसएप का ज्यादा  इस्तेमाल आपको बीमार भी कर सकता है।


मोबाइल का इस्तेमाल सही तरह से करे –

शोधकर्ताओ का कहना है कि मोबाइल फोन के अधिक प्रयोग से बच्चो में कंधे और रीढ़ से जुड़ी समस्याए शुरू हो जाती है। मोबाइल फोन पर लगातार गर्दन झुकाने रहने से रीढ़ कि हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी तरह कंधो का सहारा लेकर बात करने से कान और कंधे कि नसों में अत्यधिक खिचाव उन्हें नुकसान पहुचा सकता है।  यह समस्या कई बार इतनी गंभीर हो जाती है कि इससे छुटकारा पाने के लिए ऑपरेशन करना पड़ता है इससे कुछ हार्मोन्स दुष्प्रभाव भी होने कि आंशका रहती है।

कम से कम करे चैटिंग

अब टेक्स्ट मैसेज करना भी कई बीमारिया साथ ला रहा है। इन्ही में से एक है – कार्पल टनल सिंड्रोम शहरों में इन दिनों कार्पल टनल सिंड्रोम कि शिकायते बढ़ती जा रही है। डॉक्टर्स के अनुसार यह बीमारी 30 से 40 कि उम्र के लोगो में सबसे ज्यादा देखी जा रही है। इस बीमारी में शुरू में  में हाथो में झुनझुनाहट और सुन्न होने लगते है तथा गंभीर स्थिति में हाथो कि सुजन आने लगती है। मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा इतेमाल इसकी वजह है इस समस्या को दूर करने के लिए आपको मोबाइल फोन का कम से कम इस्तेमाल करना होगा।

सोशल मिडिया से ज्यादा न चिपके –

आज लगभग हर दूसरा व्यक्ति पूरा दिन स्मार्टफोन पर बिताता है। इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप सात या उससे ज्यादा घंटे अपने मोबाइल या टैबलेट पर बिताते है तो अलर्ट हो जाए क्योकि इसके परिणाम गंभीर हो सकते है। एक रिसर्च से पता चला है कि स्मार्टफोन से घंटो चिपके रहने कि आदत लोगो को बीमार बना रही है। सोशल मिडिया साइट्स जिनके उपयोग से अपर्याप्तता कि भावना बढ़ती है।

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